Modinagar : गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का दावा है कि किसी भी दशा में अनाधिकृत निर्माण नही होने दिया जायेंगा। परंतु ऐसा लगता है कि सतर्कता धरातल पर नहीं बल्कि कागजों में बरती जा रही है। क्योंकि दिल्ली- मेरठ हाइवे स्थित मोहन पार्क गेट के निकट कई मंजिला इमारत का अवैध निर्माण हो या फिर व हाइवे पर ही कई अन्य अवैध निर्माण पर हो रहे कई मंजिला अवैध निर्माण ट्रैक पर विभागीय अधिकारियों की बड़ी लापरवाही दौड़ रही है। ट्रैक को थामे रखने वाले स्थानीय गााजियाबाद विकास प्राधिकरण के अधिकारीयों की मीलिभगत से तहसील क्षेत्र में दर्जनों अवैध निर्माण हो रहे है। ऐसे में यंहा से सरकार को करोड़ों के राजस्व की हानि उठानी पड़ रही है लेकिन, अधिकारियों का कोई ध्यान नहीं है।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा प्राधिकरण अधिनियम की धाराओं के अन्तर्गत नोटिस जारी किए जाने व ध्वस्तीकरण की चेतावनी दिए जाने के बाबजूद भी नियमों को ताक पर रखकर मोदीनगर के हाइवे स्थित मोहन पार्क गेट पर अवैध रूप से निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत के स्वामी को जोन-2 के प्रवर्तन प्रभारी ने निर्माण कार्य की खुली छूट दे रखी है। यदि ऐसा नही है, तो इमारत में धड़ल्ले से रात दिन किसकी शह पर काम चल रहा है। सवाल उठ रहा है कि जीडीए द्वारा प्रभारी आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज क्यों नही करा रहे हैं। प्राधिकरण अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार मोहन पार्क के निकट बन रही निर्माणाधीन बहुमंजिला इमारत अवैध है ओर इसके निर्माण से प्राधिकरण को लाखों के राजस्व की हानि भी पंहुची है। बावजूद इसके जंहा इसके लिए निर्माणकर्ता आरोपी है, वही जोन-2 के प्रवर्तन प्रभारी अथवा यंहा तैनात जेई भी कम दोषी नही है। प्रवर्तन प्रभारी कोई कानूनी कार्रवाई अमल में नही ला रहे हैं। जिसका नतीजा है कि निर्माणकर्ता प्राधिकरण द्वारा बार बार नोटिस व चेतावनी के बाबजूद मौका देखकर निर्माण कार्य शुरू करा देता है। इस इमारतों का निर्माण जल्द ही पूरा कराने के लिए दर्जनों श्रमिकों कारीगरों को लगाकर दिन-रात कार्य कराया जा रहा है शहरभर में ये कोई एक इमारत नही बल्कि करीब आधा दर्जन से अधिक ऐसी इमारतों व प्लाटिंग का कार्य जारी है।
अगर नियमों की बात की जाये एक बार इमारत के स्वामी के विरूद्व नोटिस जारी होने व काम रोके जाने की चेतावनी के बाद मामला लंबित हो जाता है ओर उसका निर्णय होने से पूर्व किसी भी तरह के निर्माण पर प्रतिबंध होता है। लेकिन यंहा निर्णय आने से पूर्व ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि निर्माणकर्ता की प्रवर्तन प्रभारी से अच्छी खासी सांठ गांठ हो गई है, जिस वजह से उनकी निर्माणकर्ता पर मेहरबानी बरस रही है। इस संबन्ध में लगातार एई आरके सिंह कहते चले आ रहे है कि मामला प्राधिकरण में रजिस्ट्रर है ओर शिकायतों पर भी कार्रवाही की जा रही है। जल्दी ही अवैध निर्माण को ध्वस्त किया जायेंगा।

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