Disha Bhoomi

Modinagar वैसे तो प्रत्येक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि या मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। इसे ही प्रदोष भी कहा जाता है। जब यही प्रदोष श्रावण माह में आता है तो उसे वर्ष की मुख्य शिवरात्रि माना जाता है। दूसरी फाल्गुन मास कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जिसे बड़े ही हर्षोल्लास एवं शुद्ध मन और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
पंडित उदय चन्द्र शास्त्री के अनुसार, शिवरात्रि पर भगवान शिव को भांग चढ़ाने एवं खाने का बहुत महत्व है। महाशिवरात्रि पर धनिष्ठा नक्षत्र मकर राशि चन्द्रमा एवं पंच ग्रही योग शुक्र, चन्द्र, शनि, मंगल व बुध का योग बहुत महत्वपूर्ण एवं शुभकारी मुहूर्त है। इस बार एक मार्च 2022 दिन मंगलवार को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी।
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। शिवरात्रि पर शिव भक्त भगवान शिव को मनाने के लिए सबसे पहले दूध से अभिषेक करें और उसके बाद जलाभिषेक करें। महादेव को दूध, दही, शहद, इत्र, देशी घी का पंचामृत बनाकर स्नान कराएं। फूल, माला और बेलपत्र के साथ मिष्ठान से भोग लगाएं। 1 मार्च 2022 मंगलवार को महाशिवरात्रि का व्रत एवं पर्व मनाया जाएगा। वसंत ऋतु के सुंदर मौसम में फाल्गुन मास के दौरान शिवरात्रि का विशेष व्रत किया जाता है। इसमे भोले के भक्त सिर्फ उनकी भक्ति में मस्त भाव विभोर व लीन रहते हैं। महाशिवरात्रि व्रत कैसे किया जाए इसके लिए शास्त्रों के अनुसार नियम तय किए गए हैं।
व्रत के नियमः
. महाशिवरात्रि पर प्रातः स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा आरंभ करें।
. व्रत में नियमों का कठोरता से पालन करने से इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।
. महाशिवरात्रि के व्रत का पारण भी विधिपूर्वक करना चाहिए।
. सूर्योदय और चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य समय में ही व्रत पारण करना चाहिए।
. शिवरात्रि पर शुभ मुहूर्तः प्रातः काल सूर्योदय से लेकर सुबह 10.42 तक विशेष शुभकारी रहेगा
. अभिजीत मुहूर्तः सुबह 11.42से दोपहर 12.32 तक।
. विजय मुहूर्तः दोपहर 02.09 से दोपहर 02.54तक।

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