2024 मार्च महीने में हो चुकी है आरोपित हेड मोहर्रिर की मौत
मोदीनगर : भोजपुर थाना एक बार फिर सुर्खियों में है। फर्जी पासपोर्ट सत्यापन मामले में एसओ समेत 10 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब थाने के मालखाने से 80 हजार रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिस हेड मोहर्रिर पर गबन का आरोप लगा है, उनकी मार्च 2024 में मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद थाना प्रभारी की ओर से उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है। अब ऐसे में उस समय तैनात रहे थाने के एसएचओ की भूमिका पर भी संदेह से इनकार नहीं किया जा सकता है। गाजियाबाद जिले का भोजपुर थाना इन दिनों चर्चा में है। फर्जी पासपोर्ट सत्यापन के मामले में थाना प्रभारी समेत नौ पर गाज गिरी। अब थाने के मालखाने में जमा रकम का ही मालखाने के हेड मोहर्रिर ने खेल कर दिया। प्रकरण पिछले दिनों सामने आया तो पुलिस उच्चाधिकारियों ने जांच कराई। एसीपी मसूरी व एसीपी वेबसिटी द्वारा जांच रिपोर्ट प्रस्तुत दी गई। इस जांच में हेड मोहर्रिर मुख्य आरक्षी गजेंद्र सिंह का नाम सामने आया। इसके बाद पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि मार्च 2024 में हेड मोहर्रिर की मौत हो चुकी है। लेकिन कागजी कार्रवाई पूरी कराने के नाम पर उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
एसीपी मोदीनगर को नहीं थी जानकारी
चौंकाने वाली बात यह है कि एसीपी मोदीनगर भास्कर वर्मा ने बताया कि उन्हें इस तरह के किसी मुकदमे की जानकारी नहीं है। इससे यह सवाल उठ रहे हैं कि मामले को लेकर विभागीय स्तर पर समन्वय की कमी है या नहीं। मामले को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, जैसे तीन साल तक हेराफेरी का पता क्यों नहीं चला? नियमित ऑडिट या निरीक्षण की प्रक्रिया में चूक कैसे हुई? मृत कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के पीछे क्या कानूनी प्रक्रिया अपनाई गई?
