मुंशी दीपक कुमार ने वेरिफिकेशन में किया था इनकी आईडी का इस्तेमाल

मोदीनगर:फर्जी पासपोर्ट मामले में गाजियाबाद पुलिस महकमे में बड़ी कार्रवाई हुई है।भोजपुर थाने में तैनात मुंशी दीपक कुमार को मुकदमे में नामजद आरोपी बनाया गया है। जबकि थाना प्रभारी सचिन बालियान समेत आठ दरोगाओं को लाइन हाजिर कर दिया गया है। मुरादनगर थाने में तैनात एक सिपाही को पासपोर्ट फर्जीवाड़े में निलंबित किए जाने की जानकारी है। पुलिस की निष्पक्ष जांच के दावों के बीच भोजपुर थाने के निलंबित किए गए मुंशी दीपक कुमार के फरार होने की सूचना है। पुलिस उससे पूछताछ ही नहीं कर पाई है कि उसने किस तरह एजेंटों से मिलकर कितने रुपये में पासपोर्ट के फर्जी वेरीफिकेशन कर दिए।
डीसीपी देहात सुरेंद्रनाथ तिवारी ने बताया कि पासपोर्ट वेरिफिकेशन में लापरवाही बताने वाले आठ उप निरीक्षकों को लाइन हाजिर कर दिया गया है। आरोप है कि मुंशी दीपक कुमार ने इन दरोगाओं की आईडी का इस्तेमाल करते हुए थाने में ही बैठे-बैठे पासपोर्ट वेरिफिकेशन निपटा दिए थे। दोनों ही मामलों में दारोगाओं पर एक मुंशी भारी पड़ रहा था। इसी प्रकरण में भोजपुर थाना प्रभारी सचिन कुमार को भी लाइन भेज दिया गया है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी पासपोर्ट बनाने वाला ये रैकेट कई राज्यों में सक्रिय था। यह अपराधियों, वांछितों और पैरोल जंप करने वाले के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें विदेश भेजने में मदद करता था। उसके लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज भी ये लोग जाली तैयार करते थे।डीसीपी सुरेंद्रनाथ तिवारी के मुताबिक, एक फर्जी पासपोर्ट के बदले ये गिरोह एक से दो लाख रुपये तक वसूलता था। वेरिफिकेशन के नाम पर पुलिसकर्मियों को करीब 15 हजार रुपये और डाक विभाग के कर्मचारियों को दो से पांच हजार रुपये प्रति पासपोर्ट दिए जाते थे। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच अब एसीपी मसूरी लिपि नगायच को सौंपी गई है। फिलहाल पुलिस 30 से ज्यादा मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है। इसके चार टीमों को 22 फरार फर्जी पासपोर्ट धारकों की गिरफ्तारी के लिए लगाया गया है। गिरफ्तारी के बाद ही साफ हो पाएगा कि फर्जी पासपोर्ट किस मकसद से बनवाए गए थे।

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