रिपोर्ट – निखिल मित्रा

अम्बिकापुर. प्रियंका ने अब तक 6 स्टेट, 4 स्कूल नेशनल और 1 इंटरनेशनल गेम खेला है. सभी स्तर पर अब तक कुल 20 गोल्ड और 2 सिल्वर मेडल जीते हैं. इंडो नेपाल में हुआ इंटरनेशनल मैच भी खेला है, जिसमे इंडिया ने गोल्ड हासिल किया था. हम बात कर रहे हैं ड्राप रो बॉल (Drop Roball) की नेशनल खिलाड़ी प्रियंका पैंकरा की, जो बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ ब्लॉक के छोटे से गांव बेलकोना की रहने वाली है. प्रियंका एक किसान परिवार से हैं और प्रियंका का परिवार उनकी इस सफलता से बहुत खुश है. बीकाॅम सेकंड इयर की इस छात्रा ने बताया कैसे एक कोच की बदौलत वह आज इस मुकाम पर है.

इस खेल के बारे में प्रियंका ने बताया कि इसकी शुरुआत 2008 में हरियाणा के रोहतक में हुई थी. इसकी ईजाद ईश्वर सिंह ने की थी और पहले यह खेल कागज या प्लास्टिक से बनी गेंद से खेला जाता था. बाद में रूल्स रेगुलेशन लाकर इस खेल का नाम ड्राॅप रो बॉल रखा गया.

टैलेंट सर्च से निकलीं प्रियंका अब तराश रहीं टैलेंट

प्रियंका के कोच राजेश प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने 2013 में स्पोर्ट क्लब की शुरुआत की थी. आस-पास के स्कूली बच्चों को नए खेल खेलने के लिए प्रेरित करते थे. उन्होंने एक टैलेंट सर्च प्रोग्राम किया था और प्रियंका भी इसी प्रोग्राम की एक खोज थी. मुख्यतः बास्केट बॉल के कोच सिंह ने बताया कि ड्राप रो बॉल खेल अभी स्कूल और यूनिवर्सिटी लेवल पर ही खेला जाता है.

राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गुजरात, हरियाणा इस राज्यों में अधिक, छत्तीसगढ़ में इस खेल का प्रचलन अभी कम है. प्रियंका इस खेल में वर्ष 2016 में जुड़ी थी और पहले ही वर्ष छत्तीसगढ़ की टीम में सिलेक्ट होकर गोल्ड जीता था. प्रियंका ने बताया वह इस खेल के लिए रोजाना शाम 2 से 3 घंटे प्रैक्टिस करती हैं और स्कूल, कॉलेज की छुट्टी होने पर भी सुबह भी प्रैक्टिस करती है. प्रियंका खुद तो यह खेल ही रही हैं साथ ही दूसरो को भी यह खेल खेलने के लिए प्रेरित करती है. बच्चों को ट्रेनिंग भी देती है.

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