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किम जोंग उन के ताबड़तोड़ मिसाइल परीक्षण, गोले दागने और दादागिरी दिखाने से दक्षिण कोरिया तंग आ चुका है। अमेरिका और जापान जैसे ताकतवर देशों की चेतावनियों के बावजूद उत्तर कोरिया पर कोई असर नहीं हो रहा है। किम जोंग ने बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों और अन्य उकसावे वाली कार्रवाई को जारी रखा है। ऐसे में दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) से उत्तर कोरिया के बढ़ते मिसाइल परीक्षणों और धमकियों पर ‘खामोशी तोड़ने’’ की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र के लिए दक्षिण कोरिया के राजदूत ह्वांग जूनकूक ने इस वर्ष उत्तर कोरिया के पहले बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण पर सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘परिषद की चुप्पी कैसे तोड़ी जाए यह एक बड़ा प्रश्न है।

 

बता दें कि ’’ उत्तर कोरिया ने 2006 में पहला परमाणु परीक्षण किया था, जिसके बाद सुरक्षा परिषद ने उस पर प्रतिबंध लगाए और पिछले कुछ वर्षों में इन प्रतिबंधों को सख्त किया गया है। इन प्रतिबंधों का मकसद उत्तर कोरिया के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों पर रोक लगाना है। हालांकि ये प्रतिबंध असफल होते ही प्रतीत हुए हैं। हाल में दोनों कोरियाई देशों के बीच तल्खी बेहद बढ़ गई है। कुछ वक्त पूर्व उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने कहा था कि उनका देश अब दक्षिण कोरिया के साथ सुलह का प्रयास नहीं करेगा और उन्होंने युद्ध में विभाजित देशों के बीच साझा राष्ट्र के विचार को खत्म करने के लिए उत्तर कोरिया के संविधान को फिर से लिखने का आह्वान किया। दोनों कोरियाई देशों द्वारा साझा राष्ट्रीय एकरूपता की भावना पर आधारित एकीकरण के दशकों पुराने प्रयास को खत्म करने का यह ऐतिहासिक कदम क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बीच उठाया गया।

 

लगातार उकसावे की कार्रवाई कर रहे किम जोंग

उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया से संबंध बनाए रखने से जुड़े अहम सरकारी संगठनों को भी समाप्त कर दिया है। बृहस्पतिवार को परिषद की बैठक से पहले अमेरिकी उप राजदूत रॉबर्ट वुड ने संवाददाताओं से कहा कि किम के उकसावे ‘‘चिंता का विषय हैं।’’ उन्होंने कहा कि परिषद के 15 सदस्यों को यह याद दिलाने की जरूरत है कि उत्तर कोरिया प्रतिबंधों और परिषद के प्रति अपने दायित्वों का उल्लंघन कर रहा है, ‘‘और हमें इस बात पर जोर देना होगा कि वह उन दायित्वों का पालन करें।’’ दक्षिण कोरिया के राजदूत ने कहा कि परिषद के सभी 15 सदस्य इस बात से चिंतित हैं कि उत्तर कोरिया की बयानबाजी और कार्रवाई ‘‘अधिक गंभीर होती जा रही है। लेकिन परिषद की चुप्पी कैसे तोड़ी जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह बड़ा प्रश्न है। हम इस पर चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति तैयार करेंगे।’’ (एपी) 

 

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