भोपाल. मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के एक गांव मे रहने वाला 12वीं क्लास का टॉपर एक दिन अचानक घर से लापता हो जाता है, उसके घर वाले उसे बहुत तलाश करते हैं, मगर वह अपने हँसते खेलते परिवार से बिछड़ जाता है और फिर कभी नहीं मिलता, मगर एक दिन किस्मत उस लापता बेटे को उसके परिवार से एक अजनबी मिलवा देता है.

यह वाक्या आज से 20 साल पहले का है, ज़ब खरगोन के एक छोटे से गांव मे रहने वाला कमलेश पाटीदार नाम का 12वीं का छात्र खेलते-खेलते अपने परिवार से बिछड़ जाता है. कई साल तक उस लड़के का पता नहीं चलता है.

वहीं दूसरी तरफ, भोपाल मे रहने वाले 55 वर्षीय मजीद खान एक टूर एन्ड ट्रेवल्स कम्पनी चलाते हैं. भोपाल के हमीदिया अस्पताल के सामने उनका दफ्तर है. कुछ दिन पहले एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक उनके ऑफिस के सामने आकर खाना मांगता है. वह उसे खाने को देते है. फिर वह युवक उन्हीं के ऑफिस के सामने फुटपाथ पर रहने लगता हैं. दो वक़्त की रोटी मजीद भाई उस युवक को खाने को देते हैं. फिर अचानक एक दिन वह युवक बोलने लगता है कि मेरा घर यहाँ हैं. मेरे घर वाले कुरियर का काम करते है और मुझे वहां जाना है.

यह सुनकर मजीद भाई उसके बताये पते पर बात करते हैं. पड़ताल में पता चलता है कि यह मानसिक विक्षिप्त युवक कमलेश पाटीदार है. जो 18 साल पहले खोया था. उसके बाद वह उसे देखने ओर मिलने भोपाल आते हैं. अपने खोये बेटे को पाकर परिवार को मानों जैसे जन्नत मिल गई हो. बेटे ने भी सभी को पहचान लिया और अपनों से सालों से बिछड़ने का गम और मिलने की ख़ुशी सबके चेहरे पर साफ झलक रही थी.

अब कमलेश अपने परिवार से मिल चुका है. उसकी भूली हुईं यादें ताज़ा हो चुकी है.  वह सबको पहचान रहा है, लेकिन इस पूरी सच्ची घटना में कमलेश के लिए मजीद भाई बजरंगी भाईजान बनकर सामने आएं है. उनका और कमलेश के परिवार का रिस्ता अब अटूट हो चला है.

Tags: Bhopal, CM Madhya Pradesh

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