Year Ender 2023: साल 2023 खत्म होने की ओर है. नए साल शुरू होने में बस कुछ ही दिन बाकी है. साल के बदलते ही हमारे घरों में कैलेंडर बदल जाते हैं . बात जब कैलेंडर की की जाए तो हिंदू धर्म हो या मुस्लिम धर्म हो या फिर ईसाई धर्म सभी धर्म में कैलेंडर को विशेष महत्व दिया जाता है. कैलेंडर के हिसाब से ही तीज और त्योहार मनाया जाते हैं. इसी के हिसाब से छुट्टियां भी तय की जाती हैं. कैलेंडर को लेकर सभी के मन में सवाल है कि इस्लामिक कैलेंडर और रोमन कैलेंडर में कितनी समानताएं हैं. आइए जानते हैं इस खबर में 

इस्लामिक कैलेंडर और रोमन कैलेंडर 

सबसे पहले बात की जाए कि दोनों ही कैलेंडर कब से प्रचलन में हैं. इस्लामिक कैलेंडर की बात की जाए तो 622 ई. में हुई थी. तो वहीं रोमन कैलेंडर की शुरूआत 46 ईपू. में हुई थी. समय के हिसाब से देखें तो दोनों कैलेंडर में से रोमन कैमेंडर काफी पुराना है. अगर दोनों कैलेंडर की उत्पत्ति और उनकी विशेषताओं को देखा जाए तो ज्यादा समानताएं नजर नहीं आती है. इस्लामिक कैलेंडर जब से बना है तब से इस प्रकार से ही चला आ रहा है. वहीं रोमन कैलेंडर में पहले से लेकर अबतक काफी बदलाव हुए हैं. 

इस्लामिक कैलेंडर अब तक वैसा ही है

इस्लामिक कैलेंडर जिसे हिज़री कैलेंडर भी कहा जाता है. उसकी शुरुआत 622 ई. में हुई थी. इस्लाम धर्म के अनुसार इस्लाम के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद इस दिन मक्का छोड़कर मदीना को चले गए थे. इस घटना को हिजरत कहा जाता है. उर्दू में हिजरत का मतलब चले जाने से होता है. हजरत मुहम्मद की मक्का से हिजरत के बाद से ही हिजरी संवत शुरू हुआ था. इसमें साल में 354 दिन होते हैं. सोलर ईयर जब सूर्य वापस अपनी जगह आता है तब 11 साल दिन छोटे होने के कारण कैलेंडर वर्ष के आखिरी महीने में कुछ दिन जोड़ दिए जाते हैं. हिजरी संवत की शुरुआत तकरीबन 1445 साल पूर्व हुई थी. तब से लेकर अबतक इस कैलेंडर में बदलाव नहीं हुए है. 

रोमन कैलेंडर में हुए हैं बदलाव

रोमन कैलेंडर की शुरुआत सबसे पहले 46 ईसा पूर्व में हुई थी. रोम के महान शासक जूलियस सीजर ने इसे बनाया था. उन्हीं के नाम पर तब जूलियन कैलेंडर कहा जाता था.  फिलहाल जो रोमन कैलेंडर प्रचलित है उसे ग्रेगोरियन कैलेंडर कहते हैं. जो जनवरी से शुरू होता है लेकिन जूलियन कैलेंडर मार्च के महीने में शुरू हुआ करता था. तब उसमें 10 महीने हुआ करते थे जनवरी और फरवरी के महीने बाद में जोड़े गए थे. ग्रेगोरियन कैलेंडर 15वीं सदी में प्रभाव में आया था.इससे पहले जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था.

नहीं हैं कोई समानता

इस्लामिक कैलेंडर और रोमन कैलेंडर दोनों की उत्पत्ति के इतिहास को जानने के बाद यह समझ आता है कि दोनों ही कैलेंडर में कोई समानताएं नहीं है. दोनों ही कैलेंडर अलग तरह के कैलेंडर है. जिस हिसाब से मुस्लिम कैलेंडर में दिन होतो हैं. इस्लामिक त्यौहार भी उसी हिसाब से मनाए जाते है. रोमन कैंलेडर भले ही काफी पुराना हो लेकिन इस्लामिक कैंलेडर को प्रभावित नहीं करता. 

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