Disha Bhoomi

Modinagar। परिवहन विभाग की स्कूल वाहनों पर सख्ती के बाद अभिभावकों की परेशानी बढ़ गई है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 60 फीसदी अभिभावकों पर अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने और फिर स्कूल से वापस लाने की जिम्मेदारी आ गई है।
परिवहन विभाग की ओर से लगातार चलाए जा रहे चेकिंग अभियान के दौरान कई स्कूल बसों और कैब का चालान काटकर जब्त किया जा रहा है। चालान के डर से ही कई स्कूलों ने बसों व कैब का संचालन बंद कर दिया है। इससे सबसे ज्यादा समस्या उन अभिभावकों को आ रही है, जहां माता-पिता दोनों कामकाजी हैं। दरअसल, 20 अप्रैल को दयावती मोदी पब्लिक स्कूल में कक्षा तीन के छात्र अनुराग की स्कूल बस हादसे में जान चली गई थी। जिसके बाद परिवहन विभाग लगातार स्कूली वाहनों की चेकिंग कर रहा है। नियमों को ताक पर रख कर चल रहे स्कूली वाहनों का चालान काटने के साथ ही जब्त भी किया जा रहा है। चालान कटने के डर से ही कई स्कूलों ने स्कूली बसों और कैब चालकों ने कैब का संचालन बंद कर दिया है। इससे अभिभावकों को बच्चों के लिए स्कूल वैन और बस की सुविधा नहीं मिल रही है। इस कारण सबसे ज्यादा परेशानी कामकाजी अभिभावकों को हो रही है। अभिभावकों को खुद ही अपने बच्चों को सुबह स्कूल छोड़ने और दोपहर में स्कूल की छुट्टी के बाद लेने जाना पड़ रहा है। हरमुखपुरी में रहने वाले आकाश शर्मा उर्फ गोल्डी ने बताया कि उनकी बेटी एक निजी स्कूल में पढ़ती है। छोटी उम्र होने के चलते वो खुद स्कूल नहीं आ जा सकती। इसके लिए उन्हें अपने ऑफिस से रोजाना बेटी को लेने आना पड़ता है। इसी तरह की समस्या अन्य अभिभावकों की भी है। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों के अभिभावकों और कामकाजी अभिभावकों को हो रही है।
किया जा रहा अनफिट बसों का पंजीयन निलंबित
परिवहन विभाग की ओर से एक दर्जन से अधिक बसों का पंजीयन निलंबित किया जा चुका है। नोटिस जारी होने की अवधि के बावजूद स्कूल प्रबंधकों ने बसों की फिटनेस नहीं कराई थी। अब स्कूल प्रबंधक इन बसों को नहीं चला सकेंगे। इन बसों को फिटनेस कराने के लिए एक महीने का समय दिया गया है। एक महीने के अंदर यदि फिटनेस नहीं कराई गई तो सभी बसों का रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया जाएगा। अन्य बसों को भी नोटिस जारी कर दिया गया है, जिनकी फिटनेस नही है।

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