Ghaziabad| दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे स्थित गाजीपुर बॉर्डर (यूपी गेट) पर किसानों ने रविवार सुबह हवन किया और प्रसाद वितरित किया। चार साल पहले हरिद्वार से दिल्ली जा रहें किसानों पर ठीक इसी जगह लाठीचार्ज हुआ था। तब से वे हर साल यहां हवन करते हैं। भाकियू ने इस जगह का नाम श्किसान क्रांति गेटश् रखा हुआ है। किसानों के जमावड़े के चलते पुलिस-प्रशासन के अधिकारी गाजीपुर बॉर्डर पर सुबह से मुस्तैद हैं। बैरीकेड्स लगाकर वाहनों को दूसरे कट से निकाला जा रहा है।
हरिद्वार से दिल्ली जा रही थी पदयात्रा
23 सितंबर को 2018 हरिद्वार से शुरू हुई किसानों की पदयात्रा 2 अक्तूबर 2018 को यूपी-दिल्ली स्थित गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंची। किसान इस यात्रा को लेकर दिल्ली में राजघाट स्थित गांधी समाधी पर पहुंचना चाहते थे। दिल्ली पुलिस ने किसानों को राजधानी में एंट्री करने से रोक दिया। किसानों पर आंसू गैस के गोले बरसाए। पानी की बौछार की। किसानों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने लाठियां भी चलाईं। कई किसान चोटिल भी हुए। उसी वक्त भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष नरेश टिकैत और प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गाजीपुर बॉर्डर का नाम श्किसान क्रांति गेटश् रख दिया था।
हर साल प्रसाद बांटते हैं किसान
गाजियाबाद से भाकियू जिलाध्यक्ष चौधरी बिजेंद्र सिंह ने बताया कि रविवार सुबह 10 बजे आसपास के जनपदों के किसान गाजीपुर बॉर्डर पर इकट्ठा हुए। दिल्ली पुलिस के अत्याचारी रवैये को याद करते हुए हवन किया और फिर प्रसाद वितरित किया। बिजेंद्र सिंह ने आगे कहा, किसान आंदोलन के वक्त से बहुत सारी मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई हैं। इन सभी मांगों को पूरा कराने के लिए किसान फिर से एकजुट होने की तैयारी कर रहें हैं।

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