चांद के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के बाद से दुनिया में हमारे वैज्ञानिकों का डंका बज रहा है. चंद्रयान 3 का विक्रम लैंडर अब चंद्रमा की सतह पर चहल कदमी कर रहा है और चंद्रमा की सतह की खोज के लिए नई-नई जानकारी जुटा रहा है. चांद पर मिली इस सफलता को लेकर भारत के तमाम वर्ग में जहां खुशी की लहर है वहीं, लोग इस उपलब्धि को अपने-अपने तरीके से बखान कर रहे हैं.

हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार और भाषाविद् डॉ. ओम निश्चल ने चंद्रयान मिशन की सफलता पर कविताएं रची हैं. इनमें उनकी बाल कविताएं काफी चर्चित हो रही हैं. प्रस्तुत हैं चंद्रयान पर उनकी दो बाल कविताएं-

ओ कवियों के चांद!

ओ कवियों के चांद
कल्पनाओं में रमने वाले!
सब रहस्य खुल चुका
न दिखना अब इतने मतवाले!!

दिखते थे यूं छैल छबीले
बनकर चंदा मामा
चंद्रयान ने पाया तुमको
पहने फटा पजामा
दीन हीन तुम मिले सतह पर
बनते हिम्मत वाले!

तुम्हें थी हिम्मत तो
बढ़कर आगे स्वागत करते
चंद्रयान के आगे आकर
तुम अगवानी करते
मगर कहीं तुम दुबक गए
जब देखे खूब उजाले।

कवियों ने कितने दुलार से
मामा कह  पुचकारा
लेकिन तुम्हें लाज आई ना
मिलना हुआ गवारा
हमने तो सोचा था
होगे बड़े नफासत वाले ।

चलो बहुत हो गया
दिख गया कितने हो दिलवाले
दिखे नहीं पर स्वागतियों में
लेकर माले वाले
व्यर्थ कहा करते हैं फिर सब
हो तुम पैसे वाले !!

ओ कवियों के चांद
कल्पनाओं में रमने वाले
सब रहस्य खुल चुका
न दिखना अब इतने मतवाले।

चंद्रयान को देख

चंद्रयान को देख चांद पर
मन में आता भाव
चंद्रयान से उड़कर जाते
हम भी उसके गांव।

वहां पहुंचकर पता लगाते
कहां हैं मां के भ्राता
जिससे सदियों से जोड़ा है
हमने कैसा नाता
कुशल क्षेम सब बतलाते हम
बैठ शिला की छांव।

कौतुक से भर भर उठते हम
देख प्रभू की लीला
हंसी खेल मामा से करते-
करते व्यंग्य रसीला
खेल खिलाते उनको
पर हम कभी न देते दांव।

हम मामा के लिए यहां से
सारे फल ले जाते जाते
क्या मालूम कि इसकी
खातिर तरस तरस रह जाते
क्या मालूम कि पेड़ भी होगा
और मिलेगी छांव ।

मगर हमारा कौतुक
सब कुछ यूं ही धरा रहा
मामा मिले, न मामी हमको
कितना दुखद रहा
विफल कामना हुई हमारी
लौटे अपने ठांव ।

चंद्रयान को देख चांद पर
मन में आता भाव ।
चंद्रयान से उड़कर जाते
हम चंदा के गांव।
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Tags: Hindi Literature, Hindi poetry, Hindi Writer, Literature

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