Apple Logo Story: दुनिया भर में कमाई के मामले में एप्पल दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है एप्पल की हर एक मिनट में 3.58 करोड रुपए की कमाई होती है. साल 1976 में स्टीव जॉब्स और उनके दो साथियों द्वारा मिलकर इस कंपनी को लांच किया गया था. तब से लेकर आज तक एप्पल ने कमाई के मामले में कई तगड़े रिकॉर्ड बना दिए हैं. वर्तमान की बात की जाए तो एप्पल  कंपनी की नेटवर्थ दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलन मस्क और जैफ बेजॉस से भी ज्यादा है. यह तो रही एप्पल कंपनी की कमाई की बात. लेकिन हम बात करने वाले हैं एप्पल के उस लोगो के बारे में जो आधा कटा हुआ नजर आता है. जिसे पहली बार देखने पर मन में कई सवाल आते हैं आखिर ऐसा क्यों है. चलिए जानते हैं इस खबर. 

पहले नहीं था कटा हुआ सेब

एप्पल का सबसे पहले जो लोगो था वह कटा हुआ सेब नहीं बल्कि महान वैज्ञानिक आइज़ैक न्यूटन थे. आइज़ैक न्यूटन जिन्होंने गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटेशनल फोर्स का अविष्कार किया था. यह लोगो डिजाइन किया था. एप्पल के को फाउंडर्स में से एक रोनाल्ड वेन ने. इसके बाद वह कंपनी से अलग हो गए थे इसके बाद ही एप्पल को नया लोगो मिला जो कि आधा खाया हुआ से नजर आता है इन सारे खाए हुए सब के पीछे कई कहानी चलती हैं चलिए जानते हैं. 

एलन ट्यूरिंग को श्रद्धांजली

एप्पल के लोगो के बारे में एक कहानी बड़ी फेमस है. कहां जाता है कि स्टीव जॉब्स और स्टीव वोजनियाक जब एप्पल के नए लोगो को तलाश कर रहे थे. तब उन्हें कंप्यूटर के महान वैज्ञानिक एलन ट्यूरिंग की याद आई. एलन ट्यूरिंग वह वैज्ञानिक थे जिन्होंने वर्ल्ड वॉर के दौरान जर्मन कोड तोड़ने की मशीन बनाई थी. लेकिन बाद में एलन ट्यूरिंग पर होमोसेक्सुअलिटी के आरोप लगाए गए. उन दिनों अमेरिका में होमोसेक्सुअलिटी एक अपराध माना जाता था. जिसके एलन दोष ठहराए गए. उन्हें साइनाइड लगा हुआ सेब खाने को दिया जिसे खाने से उनकी मृत्यु हो गई. उनके शव के पास आधा खाया हुआ से पड़ा था. उसी को देखते हुए स्टीव जॉब्स और स्टीव वोजनियाक ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए ऐसे ही लोगो के तौर पर रखा. 

ये है असली वजह

एप्पल के लोगो के बारे में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इतनी कहानी मौजूद थी. जिसके बाद एप्पल के डिजाइनर रॉब जैनिफ ने खुद बताया कि एप्पल का लोगो आधा हुआ कटा क्यों है. उन्होंने कहा कि इस लोगो को बनाने के पीछे उन्होंने यह सोचा था कि एप्पल के लोगो को लोग आसानी से पहचान सके. एप्पल का लोगो अगर पूरा रखते तो लोग उसे चेरी या टमाटर समझ लेते. इसीलिए उन्होंने कटे हुए सेब को बनाया ताकि वह अलग रहे सबसे. लोग महसूस कर सके कि वह इसे खा रहे हैं. 

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