हाइलाइट्स

नीरज चोपड़ा ने जेवलिन थ्रो इवेंट में ऑफिशियल्स को लेकर सवाल खड़े किए हैं
तकनीकी समस्या के कारण नीरज चोपड़ा का पहला थ्रो मापा नहीं गया था

नई दिल्ली. ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियन नीरज चोपड़ा ने एशियन गेम्स में भी अपनी बादशाहत बरकरार रखी और जेवलिन थ्रो का गोल्ड मेडल जीता. हालांकि, उन्होंने इवेंट में अंपायरिंग को लेकर सवाल उठाए. मेंस जेवलिन के फाइनल के दौरान नीरज का पहला थ्रो तकनीकी समस्या के कारण मापा नहीं जा सका था. इसके बाद नीरज को दोबारा थ्रो करने को कहा गया था, इससे भारतीय एथलीट के अलावा फैंस भी काफी गुस्से में थे. हालांकि, नीरज ने अपना संयम नहं खोया और चौथे अटेम्प्ट में 88.88 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल जीता.

नीरज चोपड़ा ने गोल्ड मेडल जीतने के बाद इस पूरे विवाद पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, “रैफरी ने थ्रो को ठीक से मापा नहीं. अगले एथलीट ने मेरे बाद थ्रो किया और फिर उन्होंने (मेरा) निशान खो दिया. कुछ देर तक वो मेरे जेवलिन का लैंडिंग स्पॉट ही ढूंढते रहे. मैंने जाकर अधिकारियों से पूछा कि क्या हुआ है? मैं जानता था कि यह अच्छा थ्रो था. मैं ठीक से नहीं जानता कि यह कितनी दूर तक गया लेकिन थ्रो अच्छा था क्योंकि वे निशान का पता नहीं लगा सके, उन्होंने मुझसे कहा कि मैं दोबारा अपना पहला थ्रो करूं.”

देरी के कारण बाकी एथलीट्स को परेशानी हुई: नीरज
नीरज ने आगे इसे लेकर कहा, “जितनी हमने देरी की, उसने बाकी एथलीट्स के लिए भी प्रतिस्पर्धा खराब की. क्योंकि हवा चल रही थी और सबको ठंड लग रही थी. मैंने पहली बार इतने बड़े इवेंट में कुछ ऐसा था. वैसे नियम 6 थ्रो करने का है लेकिन मैंने 7 थ्रो किए.”

किशोर जेना के साथ भी गड़बड़ हुई थी
नीरज चोपड़ा के अलावा जेवलिन थ्रो में सिल्वर मेडल जीतने वाले भारत के ही किशोर जेना के साथ भी गड़बड़ हुई थी. किशोर को उनके एक थ्रो के दौरान तय स्पॉट से आगे जाने के लिए फाउल करार दिया गया था. हालांकि, इस घटना के वीडियो और तस्वीरों में साफ नजर आ रहा था कि किशोर फाउल लाइन के भीतर ही थे और लाइंसमैन ने गलत कॉल किया था. इसके बाद किशोर ने इसका विरोध किया, बाद में उनके अटेम्प्ट को सही माना गया. जेना ने 86.77 मीटर के अपने तीसरे प्रयास के दम पर सिल्वर मेडल जीता और अगले साल पेरिस में होने वाले ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया.

ज्योति याराजी के साथ भी हुआ था विवाद
इससे पहले, भारत की ज्योति याराजी को महिलाओं की 100 मीटर हर्डल रेस में फॉल्स स्टार्ट के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था. असल में लेन 4 में खड़ी चीनी एथलीट यानि वू ने फॉल्स स्टार्ट किया था लेकिन अधिकारियों ने याराजी को ही डिस्क्वालिफाई कर दिया जो उनके पास वाली लेन में खड़ीं थीं. भारतीय एथलीट के विरोध के बाद रीप्ले के आधार पर सही फैसला लिया गया और आखिर में वू को अयोग्य घोषित किया गया और ज्योति के ब्रॉन्ज मेडल को सिल्वर में अपडेट किया गया.

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‘गड़बड़ तो हुई है’
नीरज ने इन सभी विवादों पर कहा, “ज्योति के साथ भी हुआ और मेरे और जेना के साथ भी. गड़बड़ तो है. लेकिन हमारे नतीजे खुद ही बोल गए. सब कुछ होते हुए भी मेहनत रंग लाई. हमारी टीम को जरूर इस ओर ध्यान देना चाहिए कि इतनी सारी चीजें गलत क्यों हुईं. मैंने ऐसा कभी बड़ी प्रतियोगिताओं में नहीं देखा है. क्योंकि पहले थ्रो में बाधा के बाद, इससे मेरा संतुलन बिगड़ सकता था. हमने देखा कि ज्योति को कैसे संघर्ष करना पड़ा था.”

Tags: Asian Games, Javelin Throw, Neeraj Chopra

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