नई दिल्ली. भारत के अंतरिक्ष प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम में, चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने 2019 में अपने लॉन्च के बाद से 65 टेराबाइट (टीबी) डेटा प्रसारित किया है. टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, डेटा का यह खजाना और अधिक विस्तारित होने के लिए तैयार है, क्योंकि चंद्रयान-3 मिशन के विक्रम लैंडर और प्रज्ञान रोवर पर पेलोड पूरी तरह से चालू हो जाएंगे.
वर्तमान में, भारत में चंद्रमा के विभिन्न पहलुओं की सक्रिय रूप से जांच करने वाले 15 वैज्ञानिक उपकरण हैं, जो सूर्य और पृथ्वी की ओर अपने अध्ययन का विस्तार करते हैं. इनमें से आठ उपकरण चंद्रयान-2 ऑर्बिटर के भीतर लगे हुए हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है.
ये चार स्वदेशी उपकरण हैं सबसे खास
प्रेषित कुल डेटा में से, अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) द्वारा विकसित चार प्रमुख उपकरणों से 60 टीबी उत्पन्न होता है. टेरेन मैपिंग कैमरा (टीएमसी), इमेजिंग इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर (आईआईआरएस), ऑर्बिटर हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरा (ओएचआरसी) और दोहरी आवृत्ति सिंथेटिक एपर्चर रडार (डीएफएसएआर). एसएसी के निदेशक नीलेश एम देसाई ने टीओआई को बताया, ‘अगस्त 2019 से अपनी निर्दिष्ट चंद्र कक्षा में ऑर्बिटर की उपस्थिति ने चंद्रमा के विकास, खनिज संरचना और इसके ध्रुवीय क्षेत्रों में जल वितरण की हमारी समझ को लगातार समृद्ध किया है. इनमें से चार उन्नत उपकरण हमारे द्वारा तैयार किए गए थे.’
सूर्य की गतिविधि का पता लगाएंगे ये उपकरण
अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) द्वारा इंजीनियर सौर एक्स-रे मॉनिटर (एक्सएसएम) ने प्राप्त डेटा में लगभग 4.5 टीबी का योगदान दिया है. यह विशेष उपकरण सूर्य और उसके कोरोना द्वारा उत्सर्जित एक्स-रे का पता लगाता है, जो क्लास (चंद्रयान-2 लार्ज एरिया सॉफ्ट एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर) नामक एक अन्य ऑनबोर्ड टूल के निष्कर्षों को मजबूत करता है. यूआर राव उपग्रह केंद्र द्वारा विकसित, क्लास चंद्र सतह के तत्वों द्वारा सूर्य-उत्पत्ति एक्स-रे के प्रकीर्णन की पड़ताल करता है.
इसरो चंद्र अभियान में लाया तेजी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-3 के लैंडर ‘विक्रम’ के चंद्रमा की सतह पर उतरने के साथ ही अपने चंद्र अभियान को तेज कर दिया है. प्रज्ञान, रोवर, अब चंद्रमा की सतह को पार कर रहा है, क्योंकि लैंडर पर कई पेलोड, जैसे कि लूनर सिस्मिक एक्टिविटी के लिए उपकरण (आईएलएसए), रेडियो एनाटॉमी ऑफ मून बाउंड हाइपरसेंसिटिव आयनोस्फीयर एंड एटमॉस्फियर (रंभा), और चंद्रा का सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट (सीएचएसटीई) चालू हैं. इसके अतिरिक्त, प्रणोदन मॉड्यूल पर हैबिटेबल प्लैनेट अर्थ (शेप) पेलोड के स्पेक्ट्रो-पोलारिमेट्री को सक्रिय किया गया है, जो इसरो की सावधानीपूर्वक योजनाओं की प्रगति को चिह्नित करता है.
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FIRST PUBLISHED : August 25, 2023, 18:13 IST
