<p style="text-align: justify;"><strong>Aeroplane:</strong> लंबी दूरी के सफर के साथ-साथ समय की बचत के लिए प्लेन यातायात का सबसे तेज साधन है. यात्री प्लेन ज्यादातर 30 या 40 हजार पर या फिर इससे ज्यादा ऊंचाई पर उड़ते हैं. इतनी ऊंचाई पर दुर्घटना होने पर जोखिम भी ज्यादा रहता है और ऑक्सीजन भी कम हो जाता है. अब सवाल यह है कि इसके बाद भी हवाई जहाज को इतनी ही ऊंचाई पर क्यों उड़ाया जाता है?</p>
<h3 style="text-align: justify;">माइलेज बढ़ता है</h3>
<p style="text-align: justify;">प्लेन को ज्‍यादा ऊंचाई पर उड़ाने के कई कारण हैं. कम ऊंचाई पर न उड़ाने का कारण है घने एयर मॉलिक्यूल्स. ज्‍यादा ऊंचाई पर हवा पतली रहती है और एयर मॉलिक्यूल्स भी न के बराबर होते हैं. इससे हवाई जहाज पूरी क्षमता के साथ उड़ पाता है, जिससे प्‍लेन का माइलेज भी बढ़ जाता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पक्षियों और बादलों का डर</h3>
<p style="text-align: justify;">कम ऊंचाई पर उड़ने में पक्षियों के प्लेन से टकराने का खतरा रहता है. ऐसे कई मामले देखने को मिल चुके हैं, जब पक्षियों के टकराने से प्लेन की आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी. पक्षी 40,000 फीट या इससे अधिक ऊंचाई तक नहीं उड़ पाते हैं. ऐसे में, इतनी ऊंचाई पर प्‍लेन को उड़ाना कम ऊंचाई के मुकाबले ज्‍यादा सुरक्षित होता है. पायलट को सिर्फ टेक ऑफ और लैंडिंग के समय ही पक्षियों का विशेष ध्‍यान रखना पड़ता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">तूफान या टर्बुलेंस का खतरा</h3>
<p style="text-align: justify;">हवाई जहाज के हवा में बनने वाले तूफान भी एक बड़ी चुनौती रहते हैं. कम ऊंचाई वाले बादलों में मौजूद पानी से प्‍लेन में टर्बुलेंस पैदा होता है. टर्बुलेंस से एयरक्राफ्ट को भी नुकसान पहुंचता है. वहीं, टर्बुलेंस के कारण यात्री भी घबरा जाते हैं. 40 हजार फीट की ऊंचाई पर बादल प्लेन से नीचे रहते हैं. जिससे इस तरह की दिक्कत का सामना भी नहीं करना पड़ता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">पहाड़ों से टकराने का खतरा</h3>
<p style="text-align: justify;">अगर प्लेन कम ऊंचाई पर होगा, तो पहाड़ी इलाके से गुजरने में दिक्कत होगी. हिमालय श्रृंखला में कई पहाड़ों की ऊंचाई 24,000 फीट तक भी है. ऐसे में प्‍लेन के पहाड़ की चोटियों से टकराने का खतरा रहता है. </p>
<p style="text-align: justify;">वहीं, ज्यादा ऊंचाई पर उड़ाने का एक फायदा यह भी है कि अगर प्लेन में कोई खराबी आ जाती है, तो लैंडिंग करने के लिए पायलट प्लेन को काफी लंबी दूरी तक लेकर जा सकता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">ATC से मिलते हैं निर्देश</h3>
<p style="text-align: justify;">प्लेन को उड़ाने की उच्‍चतम सीमा 42,000 फीट है. दरअसल, इससे ज्‍यादा ऊंचाई पर ले जाने के लिए प्लेन के इंजन को बहुत ज्‍यादा ताकत लगानी पड़ेगी. इसके अलावा प्‍लेन के केबिन में प्रेशर बहुत ज्‍यादा घट जाएगा. इसलिए सुरक्षा के लिहाज से प्लेन एक तय ऊंचाई के भीतर ही उड़ सकते हैं. ऊंचाई को कम या ज्यादा करने के लिए पायलट को लागतार ATC से निर्देश मिलते रहते हैं.<br />­<br /><strong>यह भी पढ़ें – <a title="क्या होता है Sleep Divorce? जिसमें कपल रहते साथ में हैं, मगर सोते वक्त फॉलो करने होते हैं ये नियम" href="https://www.abplive.com/gk/what-is-sleep-divorce-how-it-is-different-from-normal-divorce-check-here-all-details-2401613" target="_self">क्या होता है Sleep Divorce? जिसमें कपल रहते साथ में हैं, मगर सोते वक्त फॉलो करने होते हैं ये नियम</a></strong></p>
