<p style="text-align: justify;"><strong>Suicide Fact:</strong> दुनिया में अक्सर हालतों से हारकर कुछ लोग खुदकुशी कर लेते हैं. इस विषय पर एक नई स्टडी हुई है जो कई हैरान करने वाले खुलासे करती है. इस स्टडी में बताया गया है कि लोग किस समय सबसे ज्यादा सुसाइड करते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि इस रिसर्च में पूर्णिमा के चांद को लेकर भी खुलासे किए गए हैं. सदियों से ऐसा माना जाता है कि पूर्णिमा के दौरान लोगों में रहस्यमय बदलाव होते हैं. पूर्णिमा के चांद को लेकर कई हॉरर मूवीज भी बन चुकी हैं. ऐसे में आइए जानते हैं आत्महत्या के मामले में पूर्णिमा के चांद को लेकर स्टडी का क्या कहना है और लोग कब सबसे ज्यादा आत्महत्या करते हैं?</p>
<h3 style="text-align: justify;">पूर्णिमा के दौरान बढ़ती हैं घटनाएं</h3>
<p style="text-align: justify;">अमेरिका की इंडियाना यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन के मनोचिकित्सकों ने अपनी एक स्टडी में पाया है कि पूर्णिमा के दौरान आत्महत्या की घटनाएं बढ़ जाती हैं. शोधकर्ताओं का मानना है कि पूर्णिमा के दौरान बढ़ी हुई रोशनी आत्महत्या की घटनाओं के वृद्धि का कारण हो सकती है. एंबिएंट लाइट लोगों के शरीर, दिमाग और व्यवहार की बायोलॉजिकल क्लॉक तय करने में अहम भूमिका निभाती है. इसका असर हमारे सोने और जागने के समय पर भी पड़ता है. इसलिए रात के वक्त जब अंधेरा होना चाहिए, तब पूर्णिमा में रोशनी बढ़ने से उसका असर लोगों पर पड़ता है</p>
<h3 style="text-align: justify;">किस समय और महीने में बढ़ती हैं घटनाएं?</h3>
<p style="text-align: justify;">रिसर्चर्स के समूह ने 2012 से 2016 के बीच 4 साल तक इंडियाना प्रांत में हुई आत्महत्याओं के आंकड़ों पर विश्लेषण किया. उन्होंने पाया कि पूर्णिमा वाले सप्ताह में आत्महत्या से होने वाली मौतें बढ़ जाती हैं. खास बात यह थी कि ये घटनाएं 55 साल से ज्यादा उम्र के लोगों में और भी ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं. आत्महत्या के समय और महीनों पर गौर करने पर शोधकर्ताओं ने पाया कि दोपहर बाद 3 से 4 बजे के बीच के समय और सितंबर के महीने में लोग ज्यादा आत्महत्याएं करते हैं.</p>
<h3 style="text-align: justify;">इन्हें है सबसे ज्यादा रिस्क</h3>
<p style="text-align: justify;">यह जानने के लिए कि इस दौरान आत्महत्या करने वालों में कौन-से बायोमार्कर मौजूद थे, अधिकारियों ने उन लोगों का ब्लड सैंपल लिया. विश्लेषण करने पर पता चला कि उन लोगों में ब्लड बायोमार्कर एक जीन होता है. यह जीन शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को कंट्रोल करता है. इस बायोमार्कर का की मदद से शोधकर्ताओं ने बताया कि शराब की लत या डिप्रेशन झेल रहे लोगों को इस दौरान सबसे ज्यादा खतरा रहता है.</p>
<h3 style="text-align: justify;">क्या होती है आत्महत्या की वजह</h3>
<p style="text-align: justify;">रिसर्चर्स का मानना है कि इसपर थोड़े और गहन अध्ययन की जरूरत है, लेकिन दोपहर 3 से 4 बजे के बीच आत्महत्या करने का संबंध दिनभर की थकान से हो सकता है. इसके अलावा, सितंबर में ऐसा होने के पीछे ये वजह हो सकती है, क्योंकि इस दौरान बहुत से लोग गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने के कारण तनाव का अनुभव करते हैं. </p>
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