हर साल सर्दी की वजह से पूरी दुनिया में कई लाख लोग अपनी जान गंवा देते हैं. इस वक्त देश की राजधानी दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. पहाड़ी इलाकों में लगातार बर्फबारी हो रही है. इस मौसम की वजह से सबसे ज्यादा तकलीफ का सामना वह लोग कर रहे हैं जिनके पास सिर छुपाने को छत नहीं है. बीते कुछ समय में मौसम के बदलाव की वजह से दुनिया भर में हुई मौतों का एक आंकड़ा जारी किया गया है, जिसके अनुसार बहुत ज्यादा सर्दी और बहुत ज्यादा गर्मी की वजह से पूरी दुनिया में कई लाख लोगों की मौत हुई है. आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि भारत समेत पूरी दुनिया में एक्सट्रीम सर्दी की वजह से कितने लाख लोगों की मौत हुई है.

भारत में हर साल कितने लोग मरते हैं

द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जनरल में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक, भारत में हर साल गर्मी की वजह से जहां 83700 लोगों की जान जाती है, तो वहीं ठंड से मरने वालों की संख्या लगभग 6.55 लाख है. हालांकि, साल 2000 से लेकर 2019 के बीच ठंड से मरने वालों की संख्या में 0.51 फ़ीसदी की कमी आई है. जबकि गर्मी से मरने वालों की संख्या में 0.21 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह क्लाइमेट चेंज की वजह से दुनिया का बढ़ता तापमान बताया जा रहा है.

पूरे एशिया का क्या हाल है

news reels

इस रिपोर्ट में जारी आंकड़ों पर ध्यान दें तो पूरे एशिया में ज्यादा गर्मी के कारण जहां साल 2000 से 2019 में 2.24 लाख लोगों की जान गई. वहीं कड़ाके की सर्दी की वजह से 24 लाख लोगों की जान गई. वहीं यूरोप की बात करें तो वहां भीषण गर्मी की वजह से 178,700 लोगों की जान गई, जबकि अफ्रीका में बहुत ज्यादा ठंड की वजह से 11.8 लाख लोगों ने अपनी जान गवाई.

कब हुआ था रिसर्च

दरअसल, यह रिसर्च साल 2000 से लेकर 2019 के बीच ज्यादा ठंड और भीषण गर्मी से होने वाली मौतों के आंकड़े को जुटाकर की गई है. इस रिसर्च में 43 देशों के 750 स्थानों पर होने वाले मृत्यु दर और मौसम संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया था. मोनाश यूनिवर्सिटी द्वारा किया गया यह रिसर्च द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ जनरल में भी प्रकाशित हुआ था. इस रिसर्च के अनुसार, एशिया में एक्सट्रीम सर्दी और एक्सट्रीम गर्मी की वजह से मरने वालों की संख्या पूरी दुनिया के मुकाबले सबसे ज्यादा थी.

ये भी पढ़ें: क्या आपको भी है प्लांट ब्लाइंडनेस! जानिए शहरी लोग इससे ज्यादा प्रभावित क्यों हैं?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *