नई दिल्ली: उच्च अदालतों में जमानत की अर्जियों की बढ़ती संख्या के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को कहा कि जमीनी स्तर पर न्यायाधीश जमानत देने के लिए अनिच्छुक हैं, क्योंकि उन्हें जघन्य मामलों में जमानत देने के लिए निशाना बनाए जाने का डर है. बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह में, सीजेआई चंद्रचूड़ ने कहा, ‘जमानत देने के लिए जमीनी स्तर पर अनिच्छा के कारण उच्च न्यायपालिका जमानत आवेदनों से भर गई है. जमीनी स्तर पर न्यायाधीश जमानत देने से हिचकते हैं, इसलिए नहीं कि वे अपराध को नहीं समझते हैं, बल्कि जघन्य मामलों में जमानत देने के लिए निशाना बनाए जाने का डर है.’

इस बीच, केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू, जो इस कार्यक्रम में भी मौजूद थे, ने तबादलों के संबंध में कई वकीलों के सीजेआई से मिलने के मुद्दे चिंता जताई. रिजिजू ने कहा, ‘मैंने सुना है कि कुछ वकील स्थानांतरण मामले के संबंध में सीजेआई से मिलना चाहते हैं. यह एक व्यक्तिगत मुद्दा हो सकता है लेकिन अगर यह सरकार द्वारा समर्थित कॉलेजियम द्वारा हर निर्णय के लिए एक आवर्ती उदाहरण बन जाता है तो यह कहां तक ​​ले जाएगा, पूरा आयाम बदल जाएगा.’ सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश धनंजय वाई चंद्रचूड़ ने 9 नवंबर को भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के रूप में शपथ ली, वह उदय उमेश ललित के उत्तराधिकारी बने.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में डीवाई चंद्रचूड़ को पद की शपथ दिलाई. सीजेआई न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ का कार्यकाल 2 वर्ष से अधिक का है. 11 नवंबर, 1959 को जन्मे न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने 1998 में भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के रूप में कार्य किया है. उन्होंने 2013 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। वह बॉम्बे उच्च न्यायालय से भी जुड़े रहे हैं और 2016 में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए थे. न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के कुछ उल्लेखनीय निर्णय भारतीय संविधान, तुलनात्मक संवैधानिक कानून, मानवाधिकार, लैंगिक न्याय, जनहित याचिका, आपराधिक कानून और वाणिज्यिक कानूनों पर हैं.

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