Disha Bhoomi

Modinagar  प्लास्टिक पर लगाम
भारत अगर एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने में वाकई कामयाब हो गया, तो यह दुनिया के लिए भी एक बड़ी सफलता होगी। एलईडी बल्ब का उपयोग बढ़ाकर और पेट्रोल में पर्यावरण अनुकूल जरूरी सुधार के बाद भारत जिस गर्व का एहसास कर रहा है, उसमें आने वाले महीनों में इजाफा होने वाला है। देश में लगभग 19 तरह के प्लास्टिक उत्पादों पर प्रतिबंध लगाकर सरकार ने निस्संदेह सराहनीय काम किया है। एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक का इस्तेमाल अपने उत्पादों में करने वाली कंपनियां समय मांग रही थीं, उन्हें लेकिन समय न देकर सरकार ने जिस दृढ़ता का परिचय दिया है, वह आने वाले दिनों में भी बनी रहनी चाहिए। लगभग 1.4 अरब लोगों के इस देश में अनेक उत्पादों का कलेवर बदलने वाला है। पिछले वर्षों में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने की कोशिशें हुई तो हैं, पर बहुत कामयाबी नहीं मिली है। प्लास्टिक की सहज उपलब्धता और किफायती होने की वजह से इसका इस्तेमाल रोके नहीं रुक रहा है। बीच में प्लास्टिक बैग पर कुछ लगाम लगी थी, लेकिन अब फिर इसका इस्तेमाल पहले की तरह दिखने लगा है। अब समय आ गया है कि सरकार पूरी कड़ाई से इस प्रतिबंध को लागू करे। खतरनाक बात यह है कि भारत सालाना लगभग 1.40 करोड़ टन प्लास्टिक का उपयोग करता है। प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के लिए एक संगठित व्यवस्था का अभाव है और देश में जगह-जगह प्लास्टिक कचरा फैला दिखता है। कई जगह यह मुसीबत बन चुका है। हम यह समझने को तैयार नहीं हैं कि अगर प्लास्टिक को ठीक से ठिकाने लगाया जाए, तब भी कई साल लग जाते हैं। अगर ठिकाने न लगाएं, तो मानव जीवन खतरे में पड़ सकता है। भारत ही नहीं, दुनिया भर में अनुचित तरीके से फेंके गए बैगों से जल प्रदूषित हो गए हैं, सीवर बंद हो गए हैं और समुद्री जीवों पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2050 तक महासागरों में मछलियों से ज्यादा प्लास्टिक होगा। अतः जरूरी है कि दुनिया युद्ध स्तर पर प्लास्टिक के उपयोग को कम करे और धरती को स्वस्थ मानव जीवन लायक बनाए रखे। जो थोड़ा सा प्लास्टिक रहें, उसे बार-बार उपयोग लायक बनाया जाए। संयुक्त राष्ट्र लगातार बताता आ रहा है कि प्लास्टिक की थैलियों से ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा मिल रहा है। अगर प्लास्टिक लगातार सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आता है, तो ऐसे प्लास्टिक की सतह से दो ग्रीनहाउस गैसों- मीथेन और एथिलीन की बड़ी मात्रा पैदा होती है। 21वीं सदी की शुरुआत से ही हल्के प्लास्टिक बैग को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की दिशा में एक वैश्विक आंदोलन चल रहा है। दुनिया भर की 90 से अधिक सरकारों ने सिंगल-यूज प्लास्टिक के उत्पादन को प्रतिबंधित कर दिया है।

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