Disha Bhoomi

Modinagar – निजी व्यवसायिक एवं तकनीकी संस्थानों में छात्रवृति को लेकर छात्रों का शोषण हो रहा है। समाज कल्याण विभाग के नाम पर संस्थानों द्वारा छात्रों से मोटी रकम वसूली जाती है। अवैध राशि का भुगतान नहीं करने पर संस्थानों द्वारा तरह तरह से छात्रों का शोषण किया जाता है। हालांकि इस धांधलेबाजी के विरोध में छात्र दबी जवान से जरुर अपनी बात रखते हैं, किंतु संस्थान के शोषण के भय से वह खुले तौर पर इसका विरोध नहीं करते हैं। जबकि इस मामले में संस्थान अपने को पाक साफ बताते हैं। उनका कहना है कि छात्रवृति पंजीकरण ऑनलाइन होता है और भुगतान भी सीधा उसके खाते मेें जाता है। संस्थान बीच में कहीं नहीं है, लेकिन अवैध वसूली के कई तरीके अपनाये जा रहें हैं ।
दरअसल, मोदीनगर सर्किल क्षेत्र औद्योगिक के साथ ही एजूकेशन हब के रुप में भी तेजी से विकसित हुआ है। करीब पचास से अधिक निजी व्यवसायिक व तकनीकी शिक्षण संस्थान स्थापित हैं। इन संस्थानों में वर्तमान में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं विभिन्न पाठ्यकर्मों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गरीब छात्र-छात्राएं मेधावी होने के वाबजूद आर्थिक कारणों से उच्च शिक्षा से वंचित न रह जाएं। ऐसे छात्रों की आर्थिक मदद करने के उद्देश्य से सरकार ने छात्रवृति वितरण की योजना लागू की थी। किंतु यह योजना संस्थान व समाज कल्याण विभाग की कथित सांठगांठ के चलते भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है।छात्रवृति में धांधलेबाजी को लेकर संस्थानों में समय-समय पर छात्र हो हल्ला करते रहते हैं। किंतु प्रबंधन के शोषण के हत्थखंडों के भय के चलते छात्र इस मामले में एकजुट होने से कतराते हैं। गत वर्ष एक निजी संस्थान में सैंकड़ों छात्र-छात्रों ने प्रबंधन पर छात्रवृति में धांधलेबाजी का आरोप लगाते हुए कई दिनों तक हंगामा रखा था। उसके अलावा भी एक अन्य निजी संस्थान के छात्रों ने प्रबंधन पर समाज कल्याण विभाग के नाम पर छात्रवृित पाने वाले छात्रों से अवैध राशि वसूलने की बात सामने आई थी। हालांकि संस्थान के छात्रों ने इस मामले में खुले रुप से बोलने से इंकार कर दिया। किंतु दबी जुबान मेें कुछ छात्रों ने यह बात स्वीकार की थी, कि छात्रवृति के नाम पर संस्थान द्वारा अवैध राशि वसूली जाती है।
निजी संस्थान छात्रवृति के मामले में अपने को बताते है पाक साफ
निजी संस्थानों के प्रबंधन ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि छात्रवृति का संस्थानों का कोईलेना देना नहीं होता। छात्रवृति का फार्म ऑनलाइन भरा जाता है। अब तो छात्रवृति का पैसा भी सीधा छात्र के बैंक एकाउंट में आता है। प्रबंधन का इससे कोई लेना-देना नहीं है। साथ ही उत्तर प्रदेश प्रावैधिक विश्वविद्यालय द्वारा संस्थानों को आदेश है कि विश्वविद्यालय में परीक्षा शुल्क जमा न होने पर छात्र को सम समेस्टर की परीक्षाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता है। इसी लिए छात्रों का उक्त आरोप पूरी तरह से निराधार है।

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