मुंबई. साल था 1976 का और फिल्म रिलीज हुई चितचोर. अमोल पालेकर और जरीना वहाब स्टारर इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा दी. एक्शन फिल्मों के इस दौर में सपाट चेहरे वाले हीरो अमोल पालेकर की इस फिल्म को खूब पसंद किया गया. इस फिल्म सेकेंड लीड में नजर आए अभिनेता विजयेंद्र घटके पर भी लोगों की नजर पड़ी.

अपनी लाजवाब खूबसूरती और फौजी की तरह कद काठी वाले अभिनेता विजयेंद्र घटके के लिए यह फिल्म ऐसी गलती बनी जिसकी कीमत वे सारी उम्र चुकाते रहे. विजयेंद्र घटके मराठा साम्राज्य के जागीरदार के बेटे थे. इसके बाद भी उन्होंने फिल्मों में अपना करियर बनाने का फैसला लिया. लेकिन सबकुछ होते हुए भी विजेंद्र घटके सुपरस्टार नहीं बन पाए.

कौन हैं विजयेंद्र घटके?
इंदौर के शाही घराने से आने वाले विजयेंद्र घटके के पिता फतेह सिंह राउत दत्ता जी राजे घटके मराठा साम्राज्य के जागीरदार थे. वे कागल का जिम्मा संभालते थे. विजयेंद्र की मां सीता देवी इंदौर के महाराजा तुकोजी होलकर की बेटी थीं. शाही खानदार और नौकरों की भरी-पूरी संख्या में पले-बढ़े विजयेंद्र घटके ने अपने परिवार का व्यापार छोड़ एक्टिंग और मॉडलिंग में अपना करियर बनाने का फैसला लिया.

बचपन में क्यूट और जवानी में अपने लुक्स से कहर ढाने वाले विजयेंद्र ने अपनी स्कूलिंग इंदौर से पूरी और की मॉडलिंग की दुनिया में कूद पड़े. कुछ ही समय में विजयेंद्र मॉडलिंग की दुनिया में छा गए और उन्होंने एक्टिंग में जाने का मन बना लिया. इसके बाद विजयेंद्र एक्टिंग के गुण सीखने के लिए एफटीआईआई पुणे चले गए. इसके बाद विजयेंद्र ने मुंबई का रुख किया और यहां आकर अपनी किस्मत आजमाने लगे.

शुरुआती करियर में ही कर दी ऐसी गलती कि सारी उम्र चुकाई कीमत
मुंबई पहुंचे विजयेंद्र घटके ने आते ही अभिनय की दुनिया में पैर जमाने की जद्दोजहद शुरू कर दी. शाही खानदार का वारिस लगातार अपना वजूद खोजता रहा. हालांकि साल 1975 में आई शत्रुघन सिन्हा स्टारर फिल्म ‘अनोखा’ में विजयेंद्र को छोटा किरदार मिल गया. हालांकि यह फिल्म विजयेंद्र को कोई खास पहचान नहीं दिला पाई. इसके बाद अगले साल 1976 में फिल्मेकर बासु चटर्जी की नजर उन पर पड़ी. बासु ने विजयेंद्र को अपनी फिल्म चितचोर में उन्हें सेकेंड लीड रोल ऑफर कर दिया. बासु के साथ काम करने के लालच में विजयेंद्र ने अपने करियर की सबसे बड़ी भूल हो गई.

विजयेंद्र ने सेकेंड लीड का किरदार किया और फिल्म भी बॉक्स ऑफिस पर हिट हुई. अमोल पालेकर और जरीना वहाब स्टारर यह फिल्म विजयेंद्र के जीवन की सबसे बड़ी गलती साबित हुई. इसके बाद विजयेंद्र एक्टर के नाम पर फेमस हो गए. इसके बाद विजयेंद्र को फिल्मों के तो बहुत ऑफर आने लगे लेकिन उन्हें लीड रोल नहीं मिला. विजयेंद्र की छवि साइड अभिनेता की हो गई. इस छवि को सुधारने के लिए विजयेंद्र ने कई प्रयास भी किए और कुछ फिल्मों में लीड रोल भी किए. लेकिन उनकी किस्मत से साथ नहीं दिया.

कई फिल्मों में किया विलेन का किरदार

मुंह में चांदी की चम्मच लेकर पैदा हुए विजयेंद्र का जीवन शाही घराने से काफी इतर रहा है. विजयेंद्र अपने करियर में सारी उम्र स्टार बनने का ख्वाब पाले रहे. लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया. लंबे समय बाद विजयेंद्र ने फिल्मों में विलेन के किरदार करने शुरू कर दिए. इन किरदारों में भी विजयेंद्र ने काफी वाहवाही बटोरी लेकिन एक बार फिर बुरी किस्मत ने उनके सपनों को धक्का पहुंचाया. बॉलीवुड की करीब 124 फिल्मों में अपनी अभिनय की छाप छोड़ने वाले विजयेंद्र के करियर में एक समय ऐसा भी आया जब वे पूरी तरह टूट गए थे.

साल 1985 एयर इंडिया कनिष्का विमान 329 यात्रियों को बिठाकर पेरिस के लिए उड़ा था. यह जहाज रास्ते में ही आतंकी हमले की भेंट चढ़ गया और सूटकेस में रखा बम फट गया. इसी प्लेन में विजयेंद्र की बहन संगीता घटके क्रू मेंबर के रूप में मौजूद थीं. अपनी छोटी बहन पर जान छिड़कने वाले विजयेंद्र ने जब उसकी मौत की खबर सुनी तो बिल्कुल टूट गए.

खुद बता चुके हैं दर्द

इस बारे में साल 2017 में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में विजयेंद्र बताते हैं, ‘वो भयानक दिन मैं जीते जी नहीं भूल सकता. मेरे दोस्त ने मुझे हादसे की फोन कर जानकारी दी थी. थोड़ी ही देर बाद मेरी बहन की खबर आ गई. मैं इस खबर से बुरी तरह टूट गया था. लेकिन उससे भी बड़ी परेशानी इस बात की जानकारी मां-पिता को देना था. मैंने फोन कर उन्हें इसकी जानकारी दी थी और इसी समय मेरी छाती फटी जा रही थी.’ विजयेंद्र ने अपने करियर में 124 से ज्यादा फिल्में की हैं. साल 2002 में आई फिल्म देवदास में भी विजयेंद्र ने ऐश्वर्या राय के पति का किरदार निभाया था. विजयेंद्र ने भारतीय सिनेमा की कई शानदार फिल्मों में काम किया है.

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