नई दिल्‍ली. मणिपुर हिंसा (Manipur violence)  मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah) एक्‍शन मोड में हैं. उन्‍होंने पड़ोसी राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, केंद्रीय गृह सचिव, निदेशक आईबी और राज्य के साथ-साथ केंद्र के संबंधित अधिकारियों के साथ दो वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग बैठकें कीं. मणिपुर में हालात सामान्य करने के लिए भारतीय वायुसेना की मदद भी ली जा रही है. गुवाहाटी और तेजपुर से गुरुवार रात को अतिरिक्त सेना के कॉलम भारतीय वायुसेना के विमानों के जरिए मणिपुर लाए जाएँगें.

नागालैंड से अतिरिक्त कॉलम भी तैनात किए गए हैं. अब मोरेह और कांगपोकपी में स्थिति स्थिर और नियंत्रण में है जबकि इंफाल और चुराचंदपुर में हालात को सामान्य करने के लिए सभी प्रयास जारी हैं. सूत्रों की मानें तो मणिपुर में सुरक्षा बलों की बड़ी तैनाती हो रही है. सेना के साथ बीएसएफ, सीआरपीएफ और असम राइफल्स की कई कंपनियों को राज्य में तैनात किया गया है. शुक्रवार को भी सुरक्षा बलों की और तैनाती की जाएगी. सीआरपीएफ की सबसे ज्यादा तैनाती पहाड़ी राज्य में की जा रही है.

हालात बदतर, 10 हजार लोगों को सुरक्षित स्‍थान पर भेजा
खुफिया सूत्रों ने गुरुवार को न्यूज18 को बताया कि मणिपुर में हालात मीडिया में बताई जा रही खबरों से भी बदतर हैं. हिंसा प्रभावित मणिपुर में स्थिति को संभालने के लिए भारतीय सेना और असम राइफल्स को बुलाया गया, जिसके बाद 10,000 लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है. एक रक्षा प्रवक्ता ने कहा कि आदिवासी आंदोलन के दौरान हिंसा भड़की और इन क्षेत्रों से लोगों को बचाया गया और आश्रय दिया गया. प्रवक्ता ने कहा कि और लोगों को भी स्थानांतरित किया जा रहा है. आदिवासियों और बहुसंख्यक मेइती समुदाय के बीच संघर्ष जारी रहने के बीच मणिपुर सरकार ने गुरुवार को “गंभीर मामलों” में देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए.

हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सेना को बुलाया
मणिपुर की राजधानी इंफाल में भड़की हिंसा को नियंत्रित करने के लिए सेना को बुलाया गया है. सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र चुराचांदपुर और इंफाल हैं. हालांकि, खुफिया सूत्रों ने News18 को बताया कि स्थिति को केवल तभी सुलझाया जा सकता है जब प्रशासन निष्पक्ष रूप से काम करे. एक खुफिया अधिकारी ने कहा कि ‘अतिरिक्त केंद्रीय बलों को भेजना होगा और क्या वे स्थानीय प्रशासन की सहायता करेंगे या स्वतंत्र रूप से काम करेंगे. इस पर बातचीत हो रही है. दरअसल वहां के पुलिस बल में भी मेइती का दबदबा है. आदिवासी बेचैन हैं क्योंकि वे खुद को नुकसान में देखते हैं.’

Tags: Home Minister Amit Shah, Manipur, Manipur Attack, गृह मंत्री अमित शाह

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