नई दिल्ली: भारत में हिंदी भाषी दर्शकों को भी दीवाने बनाने वाली ‘पुष्पा: द राइज’ (Pushpa The Rise) दिसंबर 2022 में रूस में रिलीज हुई, तो नया रिकॉर्ड कायम हो गया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने बीते 25 दिनों में वहां 13 करोड़ रुपये कमाए हैं, जो किसी भी साउथ इंडियन फिल्म की तुलना में ज्यादा है.

‘पुष्पा: द राइज’ रूस में अभी भी 774 से ज्यादा स्क्रीन्स पर दिखाई जा रही है. रूसी लोगों में भारतीय फिल्मों को लेकर दीवानगी अब से नहीं, काफी पहले से है. फिलहाल, रूस-यूक्रेन वॉर के बाद भारतीय फिल्में रूसी दर्शकों का ज्यादा ध्यान खींच रही हैं. दरअसल, हॉलीवुड के कुछ फिल्म मेकर्स ने रूस में फिल्में रिलीज करने से मना कर दिया है, जबकि क्रेमलिन ने कुछ वेस्टर्न एक्ट्रेस पर बैन लगाया हुआ है. ऐसे माहौल में, रूसी दर्शक भारतीय फिल्मों का स्वागत कर रहे हैं. खासकर, मॉस्को में भारतीय फिल्में खूब दिखाई जा रही हैं.

भारत के कल्चर से प्यार करते हैं रूसी
जब यूएसएसआर का शासन था, जब राज कपूर, शशि कपूर जैसे सितारे वहां बेहद मशहूर थे. रूस के साथ राजनयिक संबंध वहां भारतीय फिल्मों के पनपने की बड़ी वजह बना. रूस में पिछले साल वहां के सबसे बड़े सिनेमाघर में SITA फिल्म फेस्टिवल का आयोजन हुआ था. SITA के प्रसिडेंट सैमी कोटवानी ने इंडिया टुडे से बातचीत के दौरान बताया था, ‘फेस्टिवल का बेहतरीन हिस्सा, उसका शुरुआती बॉलीवुड शो रहा. बॉलीवुड गानों पर परफॉर्म करने वाले सभी डांसर्स रूसी थे. उस पुराने दौर को देखकर खुशी मिली, जब भारतीय सिनेमा यहां पॉपुलर था.’

बॉलीवुड के सोवियत रूस से रहे हैं मजबूत संबंध
सोवियत सिनेमा पर बॉलीवुड का सबसे ज्यादा असर रहा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 1954 से 1991 के आंकड़े पर नजर डाले, तो उस दौरान सोवियत यूनियन में 200 से ज्यादा भारतीय फिल्मों का इंपोर्ट हुआ, जबकि अमेरिका की 41 फिल्में ही दिखाई गईं. साल 1982 में रिलीज हुई ‘डिस्को डांसर’ सोवियत यूनियन के काल में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली बॉलीवुड फिल्म थी.

बॉलीवुड फिल्मों में ग्लैमर के दीवाने हैं रूसी
राज कपूर का जादू रूसी दर्शकों पर छा गया था, जब उनकी फिल्म ‘आवारा’ 1954 में रिलीज हुई थी. यह सोवियत संघ में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दूसरी विदेशी फिल्म थी. एस्मे राइट ने एक रिपोर्ट में लिखा था कि बॉलीवुड सिनेमा को लेकर सोवियत दर्शकों में जो अपील थी, वह अमेरिकी सिनेमा से मिलती थी. बॉलीवुड फिल्मों का ग्लैमर, मर्लिन मुनरो और स्टीव मैकक्वीन की फिल्मों से ज्यादा था. उन्होंने माना कि भारतीय समाज के मूल्य उसे यूएसएसआर के साथ काफी अनुकूल बनाते थे. अच्छे और बुरे का फर्क, रंक से राजा बनने की कहानियां रूसी दर्शकों को भी भाती रही हैं.

भारत और रूस के बीच मजबूत राजनैतिक संबंध
भारत और यूएसएसआर के बीच मजबूत राजनैतिक संबंधों का होना, सोवियत यूनियन के काल में बॉलीवुड के पनपने की बड़ी वजह रहा है. 1947 में भारत की आजादी के बाद, सोवियत संघ ने राजनयिक संबंध मजबूत करने शुरू कर दिए थे. भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नहरू ने साल 1955 में सोवियत यूनियन की यात्रा की थी.

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