निखिल स्वामी/ बीकानेर. कहते है प्रतिभा के आगे कोई नंबर मायने नहीं रखता है. ऐसी ही एक प्रतिभा है जिसका लोहा एशिया के साथ अब पूरी दुनिया मानने लगी है. एक ऐसी प्रतिभा है जिसने बीकानेर के साथ पूरे भारत का नाम रोशन किया है. हम बात कर रहे है बीकानेर के लेखराम खिलेरी की. जिसने हाल ही में चीन के हांगझाऊ में चल रहे एशियन गेम्स में रोइंग इवेंट यानी नौकायन में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. मेडल जितने पर बीकानेर के तिलक नगर स्थित घर में खुशी का माहौल बना हुआ है. परिवार के फोन और मिलने वालों में बधाई का तांता लगा हुआ है.
लेखराम के पिता जगनराम ने बताया कि लेखराम की स्कूली शिक्षा बीकानेर से 50 किलोमीटर दूर लखासर गांव में हुई है. वह बचपन से ही खेल और अन्य गतिविधि में भाग लेता रहता था. लेकिन पढ़ाई के प्रति उसकी रुचि थोड़ी कम थी. ऐसे में लेखराम के दसवीं और बारहवीं में सेकेंड डिविजन आए है, लेकिन आज उसने मेडल जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा के आगे नंबर कोई मायने नहीं रखते है. लेखराम के पिता बताते है कि वे खुद बीएसएफ में थे, फिर सेवानिवृत हो गए. वे बताते हैं कि एक दिन उनके बेटे ने आर्मी में जाने को कहा तब से वे मार्गदर्शन दे रहे हैं और कही न कही लेखराम ने अपने पिता को प्रेरणा मानकर आर्मी में जाने की ठानी. लेखराम की माता गृहणी है और उनकी दो बहने है. एक बहन मंजू की शादी करवा दी तो दूसरी संगीता डूंगर कॉलेज में ड्राइंग की स्टूडेंट है.
लेखराम के पिता जगनराम बताते है कि लेखराम की 2017 में आर्मी में सिलेक्शन हुआ और उसी दौरान रोइंग यानी नौकायन खेल खेलना शुरू किया. गांव और शहर में यहां नौकायन की कोई सुविधा नहीं थी तो उसने आर्मी में खेल खेलना शुरू किया. लेखराम ने नेशनल स्तर पर कई मेडल जीते है. लेखराम के पिता ने बताया कि उनका और लेखराम का सपना है वे ओलंपिक में जाकर भारत का नाम रोशन करें.
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FIRST PUBLISHED : September 28, 2023, 09:33 IST
