नई दिल्ली. भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने प्लास्टिक के पूरी तरह नष्ट हो जाने वाले दावों को ‘भ्रामक विज्ञापन’ बताते हुए पर्यावरण मंत्रालय से किसी भी प्लास्टिक विनिर्माता को इस तरह का प्रमाणपत्र न देने का सुझाव दिया है. बीआईएस के महानिदेशक प्रमोद कुमार तिवारी ने बुधवार को यहां संवाददाताओं से कहा कि प्लास्टिक स्वाभाविक रूप से पूरी तरह नष्ट होने वाली चीज नहीं है और अगर कोई विनिर्माता इस तरह का दावा करता है तो उसे भ्रामक विज्ञापन के समान माना जाएगा.

तिवारी ने कहा, ‘प्लास्टिक के पूरी तरह नष्ट हो जाने का तथ्य अभी स्थापित नहीं हुआ है और इस बारे में शोध भारत समेत कई देशों में अब भी जारी हैं. ऐसी स्थिति में पर्यावरण मंत्रालय को प्लास्टिक के शत-प्रतिशत नष्ट हो जाने संबंधी कोई भी प्रमाणपत्र जारी नहीं करना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हाल ही में हुई एक बैठक में प्लास्टिक के नाशवान उत्पाद होने के बारे में बीआईएस की राय से अवगत कराया गया.

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बीआईएस महानिदेशक ने कहा, ‘कुछ प्लास्टिक विनिर्माता यह दावा कर रहे हैं कि उनके प्लास्टिक उत्पाद जैविक रूप से नष्ट होने वाले हैं. हमने मंत्रालय को कहा कि वह इस तरह का कोई भी प्रमाणपत्र न दे क्योंकि इस बारे में अभी शोध जारी है.’

Tags: Plastic waste, Single use Plastic

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