हाइलाइट्स

जिंदगी के कुरुक्षेत्र में खुद को अर्जुन और महेश भट्ट को कृष्ण बताते रहे हैं अनुपम
फिर भी अनुपम की राजनीतिक बयानबाजी से ठन गई थी दोनो में

करियर के शुरुआत में ही ‘सारांश’ जैसी शानदार फिल्म करने वाले अनुपम खेर को फिल्म जगत का बेहद उम्दा कलाकार माना जाता है. ये अलग बात है, कि बीते कुछ सालों में वे अपने बयानों को लेकर अधिक चर्चा में रहे. अनुमप खेर ने भी ये स्वीकार किया है कि उनके इस रुख के कारण फिल्मकार महेश भट्ट से उनका विवाद हो गया था. महेश भट्ट को वे वे हमेशा अपना ‘गॉडफादर’ मानते हैं. सिनेमा में ‘अपना पिता अपना गुरु’ मानते हैं. अपनी हर फिल्म के पहले उन्हें 500 रुपये गुरुदक्षिणा के तौर पर देते रहे हैं.

अपनी किताब –“ जीवन के अनजाने सबक – एक आत्मकथा” के चौथे हिस्से को अनुपम ने ‘गुरुजन” शीर्षक दिया है. इसमें सबसे पहले उन्होंने महेश भट्ट का जिक्र किया है. उन्हें अपने ‘गॉडफादर’ बताया है. उन्होंने ये भी लिखा कि ‘सारंश’ रीलीज हो जाने के बाद जब भी वे कोई भी फिल्म करते रहे तो गुरुदक्षिणा के तौर पर पांच सौ रुपये पहले महेश भट्ट को जरूर देते रहे. बाद में ये रकम बढ़ायी भी.

व्यस्तता से भट्ट की कई फिल्में नहीं कर सके
किताब में अनुपम खेर ने लिखा है कि एक दौर ऐसा आया जब वे बहुत व्यस्त हो गए. महेश भट्ट को उनके बगैर ही फिल्में बनानी पड़ीं. अनुपम खेर लिखते हैं – “फिर भी मैंने अपनी नई फिल्म में काम करने के लिए उन्हें गुरुदक्षिणा के रूप में ‘500 रुपये’ से शुरु करके बाद में उससे ज्यादा देने की परंपरा को नहीं छोड़ा…” उन्होंने ये भी लिखा है कि जब महेश भट्ट अनुपम के स्कूल में आते थे तो उसके लिए सम्मान के तौर पर वे बीस हजार रुपये देते रहे. आगे अनुपम खेर ने साफ किया है कि महेश भट्ट को इन पैसों की जरूरत नहीं थी. फिर भी वे सार्वजिनक तौर पर कह देते थे – “पहले मेरे पैसे दो.” अनुपम लिखते हैं – “मेरे लिए ये एक परंपरा है, एक महत्वपूर्ण समारोह, जो मुझे उनके करीबी होने का अहसास दिलाता है.”

खास बात है कि इसी अध्याय में अनुपम खेर ने अपने पिता और दादा जी के बारे में लिखा है. उन्होंने ये भी लिखा है कि सारांश में उनकी भूमिका निभाने के लिए वे हमेशा दादा जी को याद करके रहे. यहां उन्होंने ये भी लिखा है कि दादा जी ने उनका व्यक्तित्व निर्माण किया. वे लिखते हैं – “ मैं अपने पात्र के केंद्र में अपने दादा जी को रख कर और महेश भट्ट ने यूजी कृष्णमूर्ति से प्रेरणा लेते हुए हमने बीवी वर्धन के चरित्र में बहु-आयामी पर्तों को जोड़ने का काम किया.”

बयानबाजी से विवाद
अनुपम खेर ने ये भी लिखा है कि जब वे 2011 में इंडियन एंटी करप्शन आंदोलन का हिस्सा बने. बाद में प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों कार्यक्रमों के लेकर मुखर तौर पर बोलने लगे तो एक दिन महेश भट्ट से विवाद हो गया.

आंखों के सामने बन रहे भारत की जीती-जागती कहानी है प्रियदर्शन की पुस्तक ‘भारत की घड़ी’

उसके बाद महेश भट्ट ने उनसे कहा –“ तुम पूरी तरह से गलत हो. तुम पूरी तरह से बदल चुके हो. तुम अब वह नहीं हो जो पहले हुआ करते थे.” इन्होंने भी महेश भट्ट को जवाब दे दिया – “प्रगति का यही मतलब होता है… .. मुझे बदलना ही है, क्योंकि कुछ मुद्दों पर आज मैं वह महसूस नहीं करता जैसा पहले करता था.”

अर्जुन कृष्ण वाली लाइन हटाने को कहा भट्ट ने
अनुपम खेर लिखते हैं कि इस विवाद से नाराज हो कर महेश भट्ट ने कहा- “वह लाइन जो तूने, मेरे बारे में अपने ड्रामा में डाली है उसे निकाल दें. जहां तू कहता है कि अगर जिंदगी कुरुक्षेत्र का युद्ध है तो मैं अर्जुन और महेश भट्ट कृष्ण है.” अनुपम ने अपने जवाब का जिक्र किया है कि उन्होंने मना कर दिया. वे किसी भी परिस्थिति में इस लाइन को नहीं निकालेंगे.

Anupam Kher News, Anupam Kher Movies, Anupam Kher Ki Film, Book of Anupam Kher, Jivan Ke Anjane Sabak Ek Atmkatha, Mahesh Bhatt News, Saransh Movie, Anupam Kher Books, Mahesh Bhatt Movies, Mahesh Bhatt Age, Mahesh Bhatt wife, Anupam Kher Wife Name, anupam kher family, Anupam Kher Son, anupam kher biography, Hindi Sahitya News, Sahitya News, Literature News, Hindi Literature News, जीवन के अनजाने सबक एक आत्मकथा अनुपम खेर, अनुपम खेर की आत्मकथा, Anupam Kher Ki Atmkatha, anupam kher biography in hindi, Hind Pocket Books, Jivan Ke Anjane Sabak Ek Atmkatha Anupam Kher

आगे उन्होंने ये भी साफ किया है कि इस विवाद का महेश भट्ट के प्रति उनके सम्मान पर कोई असर नहीं पड़ा. वे लिखते हैं – “… मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि इसका उनके प्रति मेरे सम्मान से कोई संबंध नहीं है. मैं उन्हें हमेशा अपने गुरु, अपने मार्गदर्शक और सिनेमा में अपने पिता के रूप में देखता हूं. वे वही रहेंगे.”

आगे अनुपम खेर ने बताया है कि कैसे 2017 में एक टीवी इंटरव्यू करते हुए जब महेश भट्ट से बातचीत की फिर उसके बाद से दोने के रिश्तों में संतुलन कायम हुआ. महेश भट्ट की चर्चा के अंत में वे लिखते हैं – “….. मैं लागातार उनके बारे में बोलता रह सकता हूं.”

पुस्तक- जीवन के अनजाने सबक एक आत्मकथा अनुपम खेर
लेखक- अनुपम खेर
प्रकाशक- हिंद पॉकेट बुक्स

Tags: Anupam kher, Book, Books, Hindi Writer, Literature, Literature and Art, Mahesh bhatt

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *