विनय अग्निहोत्री/भोपाल. हिंदू धर्म में विवाह को एक पवित्र संस्कार माना जाता है. विवाह भी हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में से एक है, जिसके विधान के अलावा शास्त्रों में आठ प्रकार के विवाह भी बताए गए हैं, जिसमें ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्राजापत्य, असुर, गंधर्व, राक्षस व पिशाच विवाह है. इसमें 13वां संस्कार विवाह को माना गया है. ज्योतिषाचार्य पुरुषोत्तम शर्मा ने बताया कि हिंदू धर्म में विवाह के दौरान सात फेरे लेने की परंपरा को सात जन्मों का बंधन माना गया है.

विवाह में दूल्हा-दुल्हन अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हैं, ताकि वे अगले सात जन्मों तक साथ रह सकें. साथ ही वह पति-पत्नी के रिश्ते को मन, शरीर और आत्मा से निभाने का वादा भी करते. लेकिन आज के परिवेश में कई विवाह 2 महीने, 2 साल और 10 साल चलते हैं. उसके बाद वैवाहिक संबंधों में विच्छेद या लड़ाई-झगड़े शुरू हो जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, वैवाहिक संबंधों की ऐसी ग्रहों के कारण बनती है और ऐसा तब होता है जब लड़का-लड़की का रिश्ता जोड़ते समय कुछ गलतियां हो जाती हैं.

शादी से पहले गुण मिलना जरूरी
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जब भी शादी विवाह की बात शुरू करें सबसे पहले लड़का लड़की की कुंडली मिलान कराएं. देखें कि उनके कितने गुण मिलते हैं? कौन सा योग बन रहा? आने वाले समय में क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं? यह सब शादी के पहले ही कुंडली देखकर उपाय कर लेना चाहिए, ताकि बाद में समस्या न हो. बताया कि लड़का और लड़की का स्वभाव एक दूसरे से कितनी मात्रा में मेल खाते है, यह समझने के लिए दोनों की कुंडली मिलान जरूरी है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, 18 गुण में शादी कर सकते हैं और 36 गुण उत्तम माने गए हैं.

वर-वधु का एक कुल हो तो…
इसके अलावा, लग्न, ग्रहों की स्थिति देखकर हमें शादी करनी चाहिए. वर एवं वधु समान कुल के हों तो दोनों घरों के कुलाचार, रीति-रिवाज, कुटुम्बियों की मानसिकता, कुटुम्बियों का वैचारिक स्तर आदि में समानता होने से दंपति को एक दूसरे के कुटुम्बियों से मेल-जोड़ बढ़ाने में आसानी होती है.

शादी के 10 साल बाद ब्रेकअप क्यों होता है
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अगर वर-वधु की कुंडली में मंगल पर शनि की दृष्टि हो या शनि मंगल को देख रहे हों और लग्न, द्वादश या अष्टम भाव से संबंध बना रहे हों तो इस स्थिति में ब्रेकअप के योग बनते हैं. इस स्थिति में हमें शादी के पहले या फिर शादी के बाद एक गाय और एक चांदी का सिक्का दान करना चाहिए. इससे एक दूसरे के अलग होने की संभावना पूरी तरह से खत्म हो जाती है.

मांगलिक दोष का रखें ध्यान
आज की पीढ़ी लव मैरिज कर रही है. ऐसे में बहुत से परिवार कुंडली का मिलान नहीं करते. ऐसे में कुंडली में मांगलिक दोष हो सकता है जो वर-वधू के भविष्य को प्रभावित कर सकता है. यदि वर या वधू में से किसी एक की भी कुंडली में मांगलिक दोष हो तो शादीशुदा जिंदगी पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है.

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