नई दिल्ली. कन्नड़ एक्टर और डायरेक्टर ऋषभ शेट्टी (Rishabh Shetty) की फिल्म कंतारा (Kantara) ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था. ये फिल्म कई भाषाओं में रिलीज़ की गई थी और सभी भाषाओं के लोगों ने इसे खूब सराहा. अपरंपरागत कहानी जिसमें दक्षिण कन्नड़ के तटीय ग्रामीण इलाकों से जुड़ी लोककथाओं से जुड़ी बातें शामिल थीं जिसे दर्शकों और आलोचकों ने बराबरी से सराहा था. हाल ही में इस फिल्म के एक सीन जैसी घटी वास्तविक घटना के चलते ये फिल्म एक बार फिर से चर्चा का विषय बन गई है.

यह घटना तटीय कर्नाटक के उडुपी जिले के एक छोटे कस्बे पदुबिदरी में घटी जहां इत्तेफाक से कंतारा फिल्म का सेट भी लगाया गया था. ये घटना 500 साल पुराने जरांदया मंदिर को लेकर हुए विवाद के इर्द-गिर्द है. जहां मंदिर के प्रशासन को लेकर दो समितियों में टकराव हो गया था और मामला कोर्ट तक जा पहुंचा. हालांकि, इस मामले से जुड़े एक व्यक्ति रहस्यमय परिस्थितियों में अदालत जाते समय मौत हो गई जैसे कि फिल्म कंतारा में एक किरदार के एक देवता द्वारा शापित होने के बाद एक विवाद को लेकर अदालत की सीढ़ियों पर मौत हो जाती है.

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ये था मामला
बंता सेवा समिति के पास पदुबिदरी जरांदया मंदिर के रखरखाव की जिम्मेदारी है. इसी सेवा समिति के सदस्यों के फेरबदल के बाद संघर्ष भड़क उठा. मामले में सत्ता गंवाने वाले प्रकाश शेट्टी ने बाद में अलग ट्रस्ट बना लिया. देवस्थानम के एक तीरंदाज जया पुजारी को ट्रस्ट का अध्यक्ष नियुक्त किया. मामले के प्रतिवादियों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने धर्मस्थल पर अपना अधिकार जताने की कोशिश की.

हंगामे के मद्देनजर प्रकाश शेट्टी और अध्यक्ष जया पुजारी कोर्ट पहुंचे. लेकिन जया पुजारी की 24 दिसंबर को रहस्यमय परिस्थितियों में अदालत जाते समय उसकी मौत हो गई. जिन लोगों ने कंतारा फिल्म देखी है वे इस घटना की तुलना फिल्म से कर रहे हैं. फिल्म में, एक राजा के वंशज ग्रामीणों के साथ भूमि विवाद को लेकर अदालत जाने का फैसला करते हैं, लेकिन उन्हें पंजुरली देव जिन्हें गांव का रक्षक माना जाता है, श्राप दे देते हैं. इसका परिणाम यह होता है कि वंशज की अदालत की सीढ़ियों पर गिरकर मौत हो जाती है.

Tags: Film, Karnataka, Udupi

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