कृष्ण कुमार/ नागौर: नागौर से अलग हुआ जिला डीडवाना कुचामन की बेटी दिव्यकृति सिंह ने अपनी टीम के साथ में मिलकर भारत को एशियन गेम्स मे गोल्ड मेडल दिलवाया है.  दिव्यकृति सिंह डीडवाना कुचामन के एक छोटे से गांव पीह की रहने वाली है. दिव्य कृति सिंह व उनकी टीम ने एशियन गेम्स की घुड़सवारी प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता है. भारत ने 41 साल बाद घुड़सवारी मे गोल्ड मेडल जीता है.

ड्रैसाज प्रिक्स सेंट जॉर्सेस मे दिव्यकृति सिंह की अगुवाई मे खेलने वाली भारतीय टीम ने 209.206 अंक हासिल किऐ है. और मेजबान चीन की टीम से आगे रही. टीम मे दिव्यकृति के अलावा सुदिप्ती हजेला, ह्रदय छेदा और अनुष अगरवल्ला की चौकड़ी ने कर्तीमान रचा है.

पीह गांव की मूल निवासी

दिव्यकृति सिंह का मूल गांव पीह है. दिव्य कृति सिंह का पूरा परिवार पोलो का शौकीन है. दिव्य कृति सिंह ने मात्र पांच वर्ष की उम्र से दिव्य कृति घोड़े की पीठ पर सवार हो गई थी. वे द पैलेस स्कूल जयपुर और मेयो कॉलेेज.गर्ल्स स्कूल अजमेर मे पढ़ी है. ऐतिहासिक जीत के बाद दिव्यकृति सिंह ने मेरा साथ कोच व घोड़ो ने निभाया जीत का असली श्रेय कोच व घोड़ो को जाता है. सिंह का कहना है कि गोल्ड अब औलम्पिक खेलो मे जीतना है नाम रोशन कर सकू.

दिव्यकृति सिंह ने जर्मनी मे रहकर प्रैक्टिस की. कुुछ समय पहले शॉर्टलिस्ट किए गए भारतीय राइडर्स के लिए चयन ट्रायल पिछले तीन महीनो से यूरोप मे थे. दिव्यकृति सिंह के पास जयपुर के मंडोता मे 80 घोड़ो का खुद का अस्तबल एवं ग्राउड है. दिव्यकृति सिंह लंबे समय से अपने घोड़ो से साथ यूरोप मे है.

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