Disha Bhoomi

UP गेट पर आंदोलन के 19वें दिन भी किसान डटे रहे। किसानों का कहना है कि उन्हें सर्दी से नहीं भूखे पेट रहने से डर लगता है। उन्हें अपनी मांग पूरी होने की इतनी चिंता है कि सर्दी से डर नहीं लगता |

किसानों का आरोप है कि सरकार MSP पर सिर्फ 6% अनाज खरीदती है, बाकी अनाज किसान आधी कीमत पर बेचने को मजबूर है। अब हालात काफी बिगड़ चुके हैं। किसानों के खुद के भोजन पर आफत आ गई है। लिहाजा, इस बार खाली हाथ दिल्ली से नहीं लौटेंगे।

बुलंदशहर के किसानों ने बताया कि वर्ष 2001 के बाद से किसान अपने आप को कमजोर महसूस करने लगे। इससे पहले मिल पर गन्ना डालने के बाद दो दिन या हफ्ते भर में पैसे मिल जाते थे। सरकार बदली तो गन्ने की पेमेंट के लिए दस से लेकर 15 दिनों में एडवाइजरी जारी होने लगी। मगर अब एडवाइजरी जारी होने में सालों लग जाते हैं।

किसान बलवीर सिंह का कहना है कि वर्ष 2011 में यूपीए सरकार के समय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाने की मांग उठी थी। लेकिन अब वह आवाज भी किसानों के लिए दब गई है। बलवीर सिंह कहते हैं कि पश्चिमी यूपी के लाखों किसान देश के लोगों का पेट भरने के लिए गेहूं की बुवाई व सिंचाई में लगे हैं। उस काम को पूरा होते ही सड़कों पर किसानों की संख्या हजारों से लाखों में बदल जाएगी।

दूसरे किसान कहते हैं कि मिलों पर गन्ना डालने के बाद पर्ची में रेट नहीं आते। इससे किसानों को पता ही नहीं चलता कि गन्ना किस रेट में बेच रहे हैं। किसान सिर्फ केंद्र सरकार से जवाब मांगने आए हैं। सरकार किसानों की बात मानने में जितनी देर लगाएगी, उतना ही नुकसान सरकार को होगा।

बताया कि यूपी गेट पर अब किसान जनप्रतिनिधियों को घेरने और आगे की रणनीति बना रहे हैं। इसके लिए सभी ग्राम पंचायतों और ब्लॉक स्तर पर किसानों से संपर्क किया जा रहा है। किसानों की अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी गई है। वह भी गांवों में पहुंचकर लोगों से रणनीति को साझा कर रहे हैं।

 

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